संजय पाठक परिवार की कंपनियों में 1000 करोड़ की धोखाधड़ी; मुख्य आरोपी महेंद्र गोयनका दिल्ली से गिरफ्तार| Navbharat Live

Published on 20 जुल॰ 2026

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सार

Economic Offence In MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी में ₹1000 करोड़ की धोखाधड़ी, 1 साल की तलाश के बाद मुख्य आरोपी महेंद्र गोयनका दिल्ली से गिरफ्तार, 4 अन्य सहयोगी फरार।

Mahendra Goenka has been arrested from Delhi in connection with the alleged ₹1,000 crore fraud case linked to companies associated with the Sanjay Pathak family

महेंद्र गोयनका दिल्ली में गिरफ्तार (सोर्स- सोशल मीडिया)

विस्तार

Mahendra Goenka Arrested In Delhi: विजयराघवगढ़ (कटनी) से भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों में लगभग 1000 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। कोलकाता पुलिस ने रायपुर के प्रमुख कारोबारी महेंद्र गोयनका को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। अदालत ने आरोपी को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

आरोप है कि महेंद्र गोयनका ने पाठक परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में फर्जी हस्ताक्षर, जाली दस्तावेजों और कंपनी रिकॉर्ड में कथित बदलाव करके संपत्तियों और वित्तीय कामकाज पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की थी।

शिकायत के बाद मामला कोलकाता में दर्ज किया

यूरो प्रतीक का रजिस्टर्ड ऑफिस कोलकाता में स्थित है, इसलिए कंपनी के प्रतिनिधि हरनीत लांबा की शिकायत पर यह मामला कोलकाता में दर्ज किया गया था। कोलकाता पुलिस अगस्त 2025 से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में गोयनका की लगातार तलाश कर रही थी। हालांकि, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई बार दबिश देने के बावजूद वह पुलिस की पकड़ से बाहर था, लेकिन आखिरकार एक साल की लंबी तलाश के बाद उसकी गिरफ्तारी हो पाई।

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कभी था कारोबारी समूह का अहम चेहरा

मूल रूप से अनूपपुर जिले के कोतमा का रहने वाला महेंद्र गोयनका कभी भारतीय जनता पार्टी के विधायक संजय पाठक के कारोबारी समूह के प्रमुख अधिकारियों में शामिल था। वह यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में वरिष्ठ प्रबंधकीय पद पर कार्यरत था और लंबे समय तक समूह के कारोबारी संचालन से जुड़ा रहा। इसी दौरान उसे कंपनी के वैधानिक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक पूरी पहुंच हासिल हुई थी।

जांच के दायरे में रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन

जांच में सामने आया है कि गोयनका ने फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के जरिए कंपनी का प्रबंधन बदलने का प्रयास किया। शिकायत के अनुसार, वैध निदेशकों और शेयरधारकों को हटाकर नए लोगों को प्रबंधन में शामिल किया गया ताकि कंपनियों के संचालन और संपत्तियों पर अवैध नियंत्रण पाया जा सके। इसके अलावा फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), अचल संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और बिके हुए माल में भी भारी अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं।

कंपनी के नियंत्रण और दस्तावेजों को लेकर शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद शुरुआत में कंपनी के नियंत्रण और दस्तावेजों को लेकर शुरू हुआ था, जो बाद में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) तक जा पहुंचा और साथ ही आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई गई। एनसीएलटी की कार्रवाई 9 मई 2025 को एनसीएलटी की मुंबई पीठ के एक आदेश में गोयनका और उनकी पत्नी मीनू से जुड़े वित्तीय गबन के आरोपों का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। इसके साथ ही गोयनका की दूसरी कंपनी निसर्ग इस्पात के वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

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चार अन्य आरोपी अभी भी फरार

इस मामले में महेंद्र गोयनका के चार अन्य रायपुर निवासी सहयोगियों— हिमांशु श्रीवास्तव, सन्मति जैन, सुनील अग्रवाल और एक अन्य—के खिलाफ भी धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े के दो मामले दर्ज हैं। इन सभी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक अग्रिम जमानत पाने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके बावजूद ये चारों आरोपी एक साल से पुलिस की पकड़ से दूर और फरार चल रहे हैं।

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