सिर्फ 10 मिनट का यह आसन घटाएगा वजन, जानिए पश्चिमोत्तानासन करने का सही तरीका और समय

Published on 27 सित॰ 2026

पश्चिमोत्तानासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, पाचन सुधारने और पेट की चर्बी कम करने में बेहद मददगार आसन है। इसे नियमित रूप से सही समय और सही तकनीक के साथ करने से मानसिक तनाव भी कम होता है।

लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने से रीढ़ की हड्डी सख्त होना और पेट पर अतिरिक्त चर्बी जमना आज आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में हठ योग की परंपरा का प्रमुख पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana) शरीर को चुस्त रखने का एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है।

संस्कृत में ‘पश्चिम’ का अर्थ शरीर का पिछला भाग और ‘उत्तान’ का आशय सीधे खिंचाव से है। आसान शब्दों में कहें तो जमीन पर बैठकर आगे की ओर झुकने वाली यह मुद्रा पूरी पीठ और पैरों की नसों को गहरा खिंचाव देती है।

पाचन दुरुस्त करने और चर्बी घटाने में मददगार

यह आसन पेट के भीतरी अंगों पर हल्का दबाव बनाता है। इससे लिवर, पैनक्रियाज और आंतों की सक्रियता बढ़ती है। नियमित रूप से आगे झुकने की इस प्रक्रिया से आंतों का संकुचन बेहतर होता है, जिससे कब्ज और गैस जैसी पाचन समस्याओं में राहत मिलती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार, यह पेट की मांसपेशियों को सक्रिय कर बेली फैट (Belly Fat) को नियंत्रित करने में सहायक है।

इसके अलावा, पेट के अंगों के सक्रिय होने से इंसुलिन स्राव पर सकारात्मक असर देखा गया है, जो डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए मददगार साबित हो सकता है।

शरीर का पिछला हिस्सा पूरी तरह खिंचने से रक्त संचार में तेजी आती है।

सुबह का समय सबसे बेहतर, शाम को बरतें यह नियम

शरीर से तनाव घटाने और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने के लिए सुबह खाली पेट इसका अभ्यास करना सबसे मुफीद है। अगर सुबह वक्त न मिले, तो शाम के समय भी यह आसन किया जा सकता है।

लेकिन एक बात का ध्यान रखें—शाम को अभ्यास तभी करें जब भोजन किए कम से कम 4 से 5 घंटे बीत चुके हों। शुरुआत में शरीर में लचक कम होने पर जबरन पैर के अंगूठे छूने या घुटने पर माथा टिकाने की जिद न करें; ऐसा करने से पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है।

इन दिक्कतों में बिल्कुल न करें अभ्यास

हर व्यायाम या योग हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता। अगर आप स्लिप डिस्क, गंभीर साइटिका या हर्निया के मरीज हैं, तो पश्चिमोत्तानासन करने की भूल न करें। पेट या रीढ़ की हालिया सर्जरी वाले लोगों को भी इससे पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं को भी पेट पर दबाव डालने वाले इस आसन से बचना चाहिए। यदि किसी पुरानी बीमारी से ग्रसित हैं, तो किसी प्रमाणित योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श के बाद ही इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें।