देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने और घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी योजना पर काम कर रही है.
देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने और घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी योजना पर काम कर रही है.
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Ambulance service: देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने और घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी योजना पर काम कर रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे पर एंबुलेंस सेवा के नेटवर्क का विस्तार करने का फैसला किया है. वर्तमान में एनएचएआइ (NHAI) केयर के तहत लगभग तीन हजार एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं. अब इस सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों को भी इससे जोड़ने जा रही है, ताकि दुर्घटना के शिकार लोगों को बिना किसी देरी के अस्पताल पहुंचाया जा सके.
हर टोल प्लाजा पर 24 घंटे मुस्तैद रहेगी आपातकालीन सेवा
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का विशाल नेटवर्क लगभग 1.46 लाख किलोमीटर में फैला हुआ है. तमाम सुरक्षा उपायों के बावजूद हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है और वर्ष 2025 में भी सड़क दुर्घटनाओं के कारण करीब 1.83 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इसी स्थिति को देखते हुए सरकार का लक्ष्य है कि देश के सभी लगभग 1200 टोल प्लाजा पर चौबीसों घंटे कम से कम एक ऐसी एंबुलेंस तैनात रहे, जिसका संचालन राज्य की आपातकालीन सेवा के तहत किया जाए. फिलहाल लगभग 500 टोल प्लाजा पर एंबुलेंस तैनात हैं, जबकि बाकी सभी टोल प्लाजा के लिए भी केंद्र सरकार एंबुलेंस खरीदकर राज्यों को सौंपेगी. संसद के पिछले सत्र में मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि यदि राज्य सरकारें दुर्घटनास्थल पर दस मिनट के भीतर एंबुलेंस पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं, तो केंद्र सरकार एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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आपातकालीन हेल्पलाइन 112 से किया जाएगा एकीकरण
एंबुलेंस सेवा के इस नए ढांचे को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्यों के सामने कुछ जरूरी शर्तें भी रखी गई हैं. राज्य सरकारों को इन एंबुलेंस का एकीकरण राष्ट्रीय आपातकालीन टोल-फ्री नंबर 112 से करना होगा. जिन क्षेत्रों में मल्टीलेन फ्री फ्लो प्रणाली के कारण फिजिकल टोल गेट मौजूद नहीं हैं, वहां राज्य सरकारें अपनी आवश्यकता के अनुसार एंबुलेंस की तैनाती करेंगी. इन एंबुलेंस का संचालन एनएचएआइ केयर सिस्टम से तालमेल बिठाकर किया जाएगा, जिससे हादसे की सूचना मिलते ही घायलों तक मदद तेजी से पहुंच सके.
संचालन का पूरा खर्च वहन करेगी केंद्र सरकार
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार, हालांकि नेशनल हाईवे पर होने वाले हादसों में पहले की तुलना में कुछ कमी दर्ज की गई है, फिर भी सरकार लगातार स्थिति सुधारने में जुटी है. इस योजना के तहत एंबुलेंस के दैनिक संचालन और प्रबंधन का जिम्मा भले ही राज्य सरकारों का होगा, लेकिन इसके संचालन में होने वाला पूरा वित्तीय खर्च केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ही वहन करेगा. मंत्रालय बहुत जल्द इस योजना के नियमों और शर्तों से संबंधित विस्तृत गाइडलाइंस जारी करने जा रहा है.
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