अरेरा, रोहितनगर-बावड़ियाकलां में खुले रहे प्रतिष्ठान: कमर्शियल उपयोग पर निगम ने दिए थे नोटिस; 10 दिन की अवधि भी पूरी - Bhopal News

Published on 30 जुल॰ 2026

भोपाल के अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़ियाकलां समेत कई इलाकों में आवासीय परिसरों में कमर्शियल एक्टिविटी पर नगर निगम गुरुवार को कार्रवाई करने वाला था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अधिकांश प्रतिष्ठान खुले रहे। निगम ने इन्हें नोटिस भी जारी किए थे। ऐसे में अब रहवा

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बता दें कि निगम ने कुल 429 नोटिस जारी किए थे। इनकी मियाद की अवधि पूरी हो गई है। ऐसे में निगम अफसरों ने दावा किया था कि गुरुवार को वे कार्रवाई करने मैदान में उतरेंगे।

यदि किसी भी स्थान पर‎ कमर्शियल गतिविधियां जारी पाई‎ जाती हैं, तो उन्हें 24 घंटे का अंतिम‎समय दिया जाएगा। इसके बाद भी‎ बात न मानने पर सीधे सीलिंग की‎ कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, टीम मौके पर नहीं पहुंची और कमर्शियल गतिविधियां जारी रही। इसे लेकर रहवासियों ने कड़ा विरोध जताया है।

रहवासियों ने दायर की थी याचिका

भोपाल की पॉश अरेरा कॉलोनी सहित अनेक आवासीय क्षेत्रों के रहवासी लंबे समय से आवासीय भूखंडों पर हो रहे अवैध व्यावसायिक निर्माण एवं व्यवसायों के विरुद्ध शिकायत कर रहे हैं। इस संबंध में रहवासी पूर्णेंदु शुक्ला एवं अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है।

जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन एवं नगर निगम से जवाब तलब किया है। रहवासियों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी न्यायालय के समक्ष वास्तविक स्थिति प्रस्तुत करने के बजाय तथ्यों को छिपाने एवं गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

रहवासियों ने कहा, देश के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में अवैध निर्माणों के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी आवासीय प्रयोजन के लिए स्वीकृत भूखंड का उपयोग व्यावसायिक अथवा वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए किया जाता है अथवा उस पर नियमों के विपरीत निर्माण किया जाता है, तो संबंधित स्थानीय निकाय एवं जिला प्रशासन ऐसे निर्माणों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।

आदेशों के पालन में उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित विभिन्न स्थानों पर प्रशासन ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई भी की है। इसी क्रम में सर्वोच्च न्यायालय ने देश के विभिन्न नगर निकायों से भी अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक निर्माणों एवं उन पर की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा है।

अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी ने कहा, यदि भोपाल नगर निगम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई नहीं करता तो सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की जाएगी।

उनका आरोप है कि आवासीय नक्शों की स्वीकृति लेकर अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर सहित अनेक रहवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक भवन खड़े कर दिए गए हैं। जिससे स्थानीय नागरिकों का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

भोपाल नगर निगम उन व्यापारियों को नोटिस थमा रहा है, जो रेसीडेंसियल लैंड का कमर्शियल उपयोग कर रहे हैं। इस पर भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) मैदान में उतर आया है। शनिवार को बीसीसीआई पदाधिकारियों ने स्थायी समाधान होने तक निगम की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।

बीसीसीआई ने व्यापारियों के समर्थन में मिक्स लैंड यूज व्यवस्था की मांग की है।

बीसीसीआई ने व्यापारियों के समर्थन में मिक्स लैंड यूज व्यवस्था की मांग की है।

मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू करने की मांग

इस मामले में भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) ने व्यापारियों के हित में मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू करने की मांग की है। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने बताया, नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने 17 जुलाई से व्यापारियों को नोटिस जारी कर मात्र 10 दिन के भीतर अपनी व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने अथवा उन्हें पूर्णतः आवासीय स्वरूप में परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे। यह निर्णय हजारों व्यापारियों एवं उनसे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा।

साल 2005 में लागू हुआ था मास्टर प्लान

अध्यक्ष गोयल और सचिव अजय देवनानी ने बताया कि भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था। इसके बाद नया मास्टर प्लान आज तक लागू नहीं हुआ है।

इस वजह से शहर के अनेक क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों के अनुरूप पर्याप्त कमर्शियल भूखंड उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। ऐसी परिस्थितियों में 10 नंबर मार्केट, अरेरा कॉलोनी, 11-12 नंबर मार्केट, 1100 क्वार्टर्स, सहयोग विहार, बावड़ियाकलां, रोहित नगर सहित नए भोपाल के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर हजारों व्यापारी वर्षों से आवासीय भूखंडों से ही अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं।

इन क्षेत्रों में अस्पताल, बैंक, क्लीनिक, शोरूम एवं अन्य सेवा प्रदाता संस्थान वर्षों से संचालित होकर नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि सभी व्यवसायी नियमित रूप से नगर निगम को व्यावसायिक दर से संपत्ति कर, मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी को कमर्शियल दर से विद्युत शुल्क और शासन द्वारा निर्धारित अन्य समस्त करों एवं शुल्कों का भुगतान कर रहे हैं। इससे शासन को करोड़ों रुपये का नियमित राजस्व प्राप्त हो रहा है।

आवासीय परिसर में व्यवसाय करना विवशता

चैंबर के सचिव देवनानी ने बताया कि व्यापारियों द्वारा आवासीय परिसरों में व्यवसाय संचालित करना उनकी विवशता है, क्योंकि नवीन मास्टर प्लान के अभाव में उन्हें उनकी आवश्यकता के अनुरूप व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके हैं।

ऐसे में बिना कोई व्यवहारिक एवं स्थायी विकल्प उपलब्ध कराए केवल 10 दिन के भीतर प्रतिष्ठानों को बंद करने के निर्देश देना न्यायसंगत एवं व्यावहारिक नहीं है। इसलिए कार्रवाई करना ठीक नहीं है।