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तहसील-1 में हाई कोर्ट स्टे के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री किए जाने का मामला सामने आया है। डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने इसकी जांच डीआरओ नवकीरत सिंह रंधावा को सौंपी है। उन्हें सोमवार तक रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं।
शुक्रवार को डीआरओ जमीन के खरीदार और बेचने वालों के अलावा सब रजिस्ट्रार, तहसील-1 की आरसी और संबंधित क्लर्कों के बयान दर्ज करेंगे। जिसके बाद सोमवार को जांच रिपोर्ट डीसी को सौंपे जाने की संभावना है।
मामला सुल्तानविंड अर्बन बैहनीवाल के पास खसरा नंबर 155-156 की जमीन से जुड़ा है। करीब 8-9 करोड़ रुपये कीमत वाली इस जमीन की रजिस्ट्री 8-9 अक्टूबर के आसपास की गई थी। आरोप है कि रजिस्ट्री के दस्तावेजों में खसरा नंबर बदलकर स्टे वाली जमीन की रजिस्ट्री करवा दी गई।
मामला सामने आने के बाद तहसील में दिनभर इसकी चर्चा रही। इस मामले में सब रजिस्ट्रार लखविंदर सिंह, क्लर्क कर्म सिंह और रजिस्ट्री क्लर्क राजबीर कौर की भूमिका की जांच होगी। राजबीर कौर का कहना है कि उनके पास अंतिम रजिस्ट्री खसरा नंबर 155 की आई थी और दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने का उनका कोई मतलब नहीं था।
कर्म सिंह ने भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने और मोहर लगाने से इनकार किया है। सब रजिस्ट्रार लखविंदर सिंह का कहना है कि उनके स्तर पर खसरा नंबर 156 की रजिस्ट्री की गई थी, जिस पर कोई स्टे नहीं था। खसरा नंबर 155 का दस्तावेज कैसे लगाया गया, इसकी जांच के लिए उच्चाधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।
उन्होंने कहा कि जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। डीआरओ नवकीरत सिंह रंधावा ने बताया कि डीसी के आदेश पर मामले की जांच शुरू की जा रही है। शुक्रवार को संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। सोमवार तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश मिले हैं। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खसरा नंबरों की उलझन साफ करेंआरोप और तथ्य अलग रखें जानकारी के अनुसार, खसरा नंबर 155 की जमीन पर एसयूवी बनाए गए हैं। इन इमारतों के अलग-अलग हिस्से बेचे जाते हैं। जमीन के मालिक पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप हैं और मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है।
हाईकोर्ट ने डीसी को इस जमीन की रजिस्ट्री नहीं करने के आदेश दिए थे। डीसी ने भी अदालत में हलफनामा देकर रजिस्ट्री नहीं होने देने की बात कही थी। आरोप है कि 8-9 अक्टूबर को खसरा नंबर 156 की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर दस्तावेज आरसी के पास जमा करवाए गए।
इसके बाद रजिस्ट्री में खसरा नंबर 155 से संबंधित दस्तावेज लगा दिए गए और इंतकाल के लिए भी भेज दिया गया। मामला सामने आने पर सब रजिस्ट्रार लखविंदर सिंह ने पटवारी को इंतकाल रोकने के आदेश दिए।