ब्यावर शहर के जामा मस्जिद लोहारन चौपड़ क्षेत्र में कर्ज के दबाव में एक युवक के आत्महत्या कर ली।
ब्यावर शहर के जामा मस्जिद लोहारन चौपड़ क्षेत्र में कर्ज के दबाव में एक युवक के आत्महत्या करने का मामला सामने आया है।
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परिजनों ने दो निजी वित्तीय संस्थाओं के रिकवरी एजेंटों पर लगातार वसूली का दबाव बनाने, धक्का-मुक्की करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 व 115(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर दोनों आरोपित एजेंटों को हिरासत में ले लिया है।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, साथ ही प्रशासन ने परिजनों की कुछ मांगों पर सहमति और अन्य पर आश्वासन दिया है।
करीब एक लाख रुपए का लिया था लोन
परिजनों के मुताबिक जफर (32) ने क्रेडिट एक्सीस ग्रामीण लिमिटेड से 70 हजार रुपए का समूह लोन तथा मुथूट फाइनेंस से करीब 30 हजार रुपए का पर्सनल लोन लिया था। लोन कब लिया गया और कितनी किश्तें बकाया थीं, इसकी जानकारी परिवार को नहीं है।

मृतक जफर हुसैन परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था।
रिकवरी एजेंटों पर गंभीर आरोप
जफर के भतीजे मोहम्मद साजिद का आरोप है कि दोनों संस्थाओं के रिकवरी एजेंट बिना किसी लिखित नोटिस या पूर्व सूचना के घर पहुंच जाते थे और फोन कर भुगतान का दबाव बनाते थे।
उनका कहना है कि शुक्रवार को क्रेडिट एक्सीस ग्रामीण लिमिटेड का रिकवरी एजेंट रामकिशोर घर पहुंचा और मृतक के पिता सलीम खान के सामने जफर के साथ कथित धक्का-मुक्की कर दोबारा आने की धमकी देकर चला गया। इससे एक दिन पहले गुरुवार को मुथूट फाइनेंस का रिकवरी एजेंट दाऊद भी कथित रूप से जफर के साथ अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की कर चुका था।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई ऑडियो, वीडियो या सीसीटीवी फुटेज सामने नहीं आया है। पुलिस भी इन आरोपों की जांच कर रही है।

जफर के भतीजे मोहम्मद साजिद ने बताया कि रिकवरी एजेंट जफर को आए दिन धमकाते थे।
तनाव के बीच उठाया कथित आत्मघाती कदम
परिजनों के अनुसार जफर सामान्य व्यवहार कर रहा था, लेकिन पिछले कुछ समय से आर्थिक दबाव के कारण मानसिक तनाव और अवसाद में था।
उनका कहना है कि शुक्रवार रात कथित घटना के बाद वह घर के अंदर गया और दुपट्टे से फंदा लगाकर कथित आत्महत्या का प्रयास किया। गंभीर हालत में उसे राजकीय अमृत कौर अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक जफर हुसैन वेल्डिंग का काम करता था और वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसके परिवार में पत्नी, छह और चार साल की दो बेटियां, चार माह का एक बेटा तथा वृद्ध माता-पिता हैं, जो पूरी तरह उसी पर आश्रित थे। परिजनों के अनुसार आर्थिक तंगी के कारण परिवार पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहा था।

परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए मोर्चरी के बाहर धरना शुरू कर दिया।
पोस्टमार्टम से पहले धरना, रखीं कई मांगें
घटना के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर मोर्चरी के बाहर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने प्रशासन के समक्ष दोनों आरोपित रिकवरी एजेंटों की गिरफ्तारी, मृतक के परिवार को कर्ज से मुक्ति, पत्नी को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या आशा सहयोगिनी के रूप में रोजगार तथा आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा देने की मांग रखी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने कुछ मांगों पर सहमति जताई, जबकि अन्य मांगों पर आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हो गए।
शाम को पोस्टमार्टम, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
शनिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मोर्चरी के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। मौके पर सिटी थानाधिकारी आशुतोष पाण्डे, तहसीलदार सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिजनों से वार्ता करते रहे।
एफआईआर दर्ज, दोनों एजेंट हिरासत में
परिजनों का आरोप है कि घटना वाली रात कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने विरोध जताया। बाद में शनिवार दोपहर ब्यावर सिटी थाने में एफआईआर संख्या 279/26 दर्ज की गई।
पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या का दुष्प्रेरण) और 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत दर्ज किया है। दोनों आरोपित रिकवरी एजेंटों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर सिटी थानाधिकारी आशुतोष पाण्डे, तहसीलदार सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिजनों से वार्ता करते रहे।
बैंक का पक्ष आना बाकी
मामले में संबंधित वित्तीय संस्थाओं का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं मिला। अब तक किसी भी संस्था की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संबंधित रिकवरी एजेंट सीधे संस्थाओं के कर्मचारी थे या आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कार्यरत थे।
सामाजिक संगठनों ने दिया समर्थन
धरने के दौरान मुस्लिम नौजवान समिति के सदर मोहम्मद साजिद और उनके साथियों ने परिजनों का समर्थन किया। हालांकि, किसी संगठन की ओर से प्रशासन को अलग से ज्ञापन नहीं सौंपा गया।