Gold Silver Rates Today: आज सुबह एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और 10-साल के बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण सोने-चांदी पर दबाव बना रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, जिसके बाद बाजार में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।
एमसीएक्स पर सोने के वायदा भाव लगभग स्थिर रहे और यह 1,41,856 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी के वायदा भाव में 0.51 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 2,16,376 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।
सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स
डॉलर और बॉन्ड यील्ड का बाजार पर प्रभाव: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101 के स्तर के आसपास मंडरा रहा था। वहीं, अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसले के बाद 10-साल के बॉन्ड यील्ड में 6 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई और यह 4.68 प्रतिशत पर पहुंच गया। बॉन्ड यील्ड में इस बढ़ोतरी का सीधा असर सोने-चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर पड़ता है, क्योंकि निवेशकों को बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिलने लगता है।
फेड ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 29 जुलाई को अपनी नीतिगत बैठक में फंड्स रेट को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखा। यह लगातार पांचवीं बार था, जब फेड ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, इस बार 12 नीति निर्माताओं में से तीन ने असहमति जताई और उन्होंने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की मांग की। फेड के चेयरमैन केविन वार्श ने एक बार फिर महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य पर लाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना: बाजार में निवेशकों का मानना है कि सितंबर में होने वाली अगली फेड बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल से पता चलता है कि सितंबर में दर बढ़ने की संभावना 63 प्रतिशत है, जो जुलाई नीति फैसले से पहले 81 प्रतिशत थी।
महंगाई के आंकड़ों का इंतजार: निवेशक आज 30 जुलाई को जारी होने वाले अमेरिकी पीसीई डेटा और दूसरी तिमाही के जीडीपी के शुरुआती अनुमान का इंतजार कर रहे हैं। ये आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दिशा और महंगाई के दबाव को समझने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष से बढ़ी चिंता: भू-राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हमले शुरू किए हैं। यह 24 जुलाई के बाद पहली बार है जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। यह कार्रवाई ईरान की मिसाइल हमले के जवाब में की गई, जिसमें जॉर्डन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया गया था। इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई का डर बढ़ गया है और ब्याज दर बढ़ने की संभावना और मजबूत हो गई है।
सोने-चांदी के लिए महत्वपूर्ण स्तर
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह का कहना है कि फेड की नीतिगत बयान में सख्त रुख देखने को मिला। उन्होंने बताया कि तेल की बढ़ती कीमतों, टैरिफ और एआई से संबंधित मांग से महंगाई का जोखिम बना हुआ है, जिससे दर बढ़ोतरी की उम्मीदें बरकरार हैं।
रवि सिंह के अनुसार जब तक 1,40,000 रुपये का स्तर बरकरार रहता है, एमसीएक्स गोल्ड 1,45,000 रुपये की ओर रिकवरी कर सकता है। यह स्तर मौजूदा ट्रेडिंग रेंज की ऊपरी सीमा के रूप में काम करेगा। हालांकि, अगर सोना 1,40,000 रुपये के नीचे जाता है तो नई बिकवाली आ सकती है और यह 1,36,000 रुपये तक गिर सकता है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। कमोडिटी मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)