.
इस साल जिले में बारिश कम होने और अक्टूबर में भी गर्मी बरकरार रहने से बिजली की खपत बढ़ गई है। 30 सितंबर तक जिले में 837 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि औसत बारिश 1075 मिमी है। यानी सामान्य से करीब 22% कम बारिश हुई। सितंबर और अक्टूबर में दिन का तापमान 34 से 37 डिग्री तक रहने से शहरों में एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल जारी है। वहीं, बारिश कम होने से भूजल स्तर गिरने के कारण किसानों को धान की सिंचाई और रबी फसलों के पलेवा के लिए मोटर पंप ज्यादा समय तक चलाने पड़ रहे हैं।
बिजली कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में खपत तेजी से बढ़ी है। 1 से 19 अक्टूबर 2026 तक 996.99 लाख यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई। वहीं, अक्टूबर 2025 में पूरे महीने की खपत 1317.32 लाख यूनिट थी। सितंबर 2026 में 1336 लाख यूनिट बिजली की खपत बताई गई है। बिजली कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि गर्मी और सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ने से आने वाले समय में दबाव और बढ़ सकता है।
सितंबर से ज्यादा बढ़ी अक्टूबर में खपत अक्टूबर में त्योहारों के साथ धान की सिंचाई के लिए मोटर पंपों का इस्तेमाल बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और शहरी इलाकों में एसी, कूलर व पंखों के कारण बिजली की मांग बनी हुई है। सितंबर 2025 में 1325.47 लाख यूनिट बिजली की खपत हुई थी, जबकि सितंबर 2026 में 1336 लाख यूनिट खपत दर्ज की गई।
कम बारिश से बिजली की खपत बढ़ी ^शहरों में एसी और गांवों में मोटर पंपों की संख्या साल-दर-साल बढ़ रही है। घरों में बिजली से चलने वाले उपकरण भी बढ़े हैं। बारिश कम होने से किसान मोटर पंपों के जरिए भूजल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी वजह से सितंबर और अक्टूबर में बिजली की खपत अधिक बनी हुई है। -अवधेश त्रिपाठी, जीएम, बिजली कंपनी, विदिशा
सोलर सिस्टम के बाद भी बिजली की मांग बरकरार शहर के कई सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में सोलर सिस्टम लगे हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली की मांग में कमी नहीं आ रही। बिजली कंपनी के जोन-2 के ईई शरद महोबिया के अनुसार, आमतौर पर अप्रैल से जून के बीच बिजली की खपत अधिक रहती है, लेकिन इस बार सितंबर और अक्टूबर में भी मांग बनी हुई है। भाटनी गांव के नंदलाल मीना और बदनपुर निवासी किशन सिंह यादव का कहना है कि उन्हें सिंचाई के लिए 5 से 6 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। वहीं, डीई श्रवण पटेल के अनुसार, सिंचाई के लिए 10 घंटे और घरेलू उपयोग के लिए 24 घंटे बिजली दी जा रही है।
6 के बजाय 10 घंटे चलाने पड़ रहे मोटर पंप : बिजली कंपनी के डीई श्रवण पटेल का कहना है कि बारिश कम होने से भूमिगत जल स्रोत सूख रहे हैं। पिछले साल 10 अक्टूबर के बाद तक बारिश हुई थी। इस साल सितंबर में ही बारिश बंद हो गई। किसानों को धान की सिंचाई के लिए मोटर पंप 6 घंटे के बजाय करीब 10 घंटे तक चलाने पड़ रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की खपत बढ़ रही है।