दोषी नाबालिग 03 महीने सरकारी अस्पताल में करेगा सामाजिक सेवा: पानीपत जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सुनाया सुधारात्मक एवं सामाजिक सरोकार से जुड़ा फैसला। - Panipat News

Published on 2 अक्टू॰ 2026

पानीपत जिले के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने जुवेनाइल कोर्ट में एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए दोषी बालक को सुधारात्मक दृष्टिकोण के तहत सरकारी अस्पताल में 3 माह सामाजिक सेवा देने की सजा सुनाई गई है। यह मामला 19 अक्टूबर 2024 का था जिसमें सिटी पु

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इसमें स्थानीय मार्केट में एक टेलर के साथ दो लड़कों की कहासुनी हो गई थी। जिसमें उसके पड़ोसी ने बीच बचाव करने पर उन लड़कों ने उस पड़ोसी की आंख के नीचे कैंची मार दी थी और वहां से फरार हो गए थे। बाद में पुलिस ने इसमें मामला दर्ज किया और सीसीटीवी फुटेज में यह पकड़े गए। इनमें एक लड़का 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था जिसके आने वाले समय में परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह सजा सुनाई गई है।

ताकि समाज के प्रति दायित्व समझे दोषी

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा, सदस्य आशिमा कौशिक और अशोक कुमार ने अपने निर्णय में सजा के साथ-साथ दोषी के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उसे समाज के प्रति अपने दायित्व का एहसास कराने पर विशेष जोर दिया है। बोर्ड के समक्ष विचाराधीन मामले में तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद दोषी के संबंध में यह आदेश पारित किया गया।

सेवा के दौरान रहेगी निगरानी, नियम तोड़ा तो दोबारा हो सकती है सजा

बोर्ड ने निर्देश दिए कि दोषी को निर्धारित अवधि तक सरकारी अस्पताल में आगामी तीन माह तक सामाजिक सेवा करनी होगी तथा इस दौरान संबंधित विभाग द्वारा उसकी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। अगर उक्त किशोर ने इसका पालन नहीं किया तो बोर्ड द्वारा यह अधिकार सुरक्षित रखा गया है कि इन्हें दोबारा से सजा दी जा सकती है। यह निर्णय किशोर न्याय व्यवस्था में सुधार, पुनर्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने की दिशा में लिया गया है।

ये रहा मुख्य मकसद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बच्चों को अपराध की पुनरावृत्ति से रोकते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना भी है। सरकारी अस्पताल में सेवा के माध्यम से दोषी को सेवा, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व समझाने का प्रयास किया जाएगा। घायल या बीमार लोग जो सरकारी अस्पताल में अपना इलाज करवाने आते हैं उनके प्रति भी उनका दृष्टिकोण बदलेगा और दूसरे को चोट पहुंचाना कितना हानिकारक हो सकता है यह भी उन्हें पता चल सकेगा।